एक सौ (१००) कर्म संबंधित एक प्रचलित कथा:-

94 का महत्व — (१००-६=९४)काशी में मणिकर्णिका घाट पर चिता जब शांत हो जाती है तब मुखाग्नि देने वाला व्यक्ति चिता भस्म पर 94 लिखता है। यह सभी को नहीं मालूम है। खांटी बनारसी लोग या अगल बगल के लोग ही इस परम्परा को जानते हैं। बाहर से आये शवदाहक जन इस बात को नहीं […]

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!!वैशाख मास व्रत एवं माहात्म्य!!

*”न माधवसमो मासो न कृतेन युगं समम्। न च वेदसमं शास्त्रं न तीर्थं गंगया समम्।।” वैशाख के समान कोई मास नहीं है, सत्ययुग के समान कोई युग नहीं है,        वेद के समान कोई शास्त्र नहीं है और गंगाजी के समान कोई तीर्थ नहीं है।    अपने कतिपय वैशिष्ट्य के कारण वैशाख उत्तम मास है।                                      एक कथा […]

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